निपाह के बहाने
अचानक ‘निपाह वायरस’ के बहाने चमगादड़ लाईमलाइट में आ गया है उसकी बन आयी है और खजूर की पिटाई चल रहीहै। . ज़रा सोचिए। जाड़ा हो,गरमी हो या बरसात हो, रमज़ानआया नहीं कि खजूर की आमद बढ़ ही जाती है और रोज़ेदारों के बहाने हम लोग भी तरह तरह के खजूर आज़माते रहते हैं। बीज वाले खजूर, बिना बीज वाले। लेकिन जब से चमगादड़ और निपाह का कनेक्शन पढ़ा । तो तौबा किया कि फ़िलहाल खजूर नहीं खाएँगे। लेकिन यहाँ न हमें निपाह वायरस की ख़ास जानकारी है और न ही उससे बचने के तरीक़ों की। बात है चमगादड़ से जुड़ी बचपन की गलियों में विचरने की। घर में सबसे बड़े भइया जो १०वीं में पढ़ते थे। और हम सब उनसे छोटे । अम्मा पापा कहीं बाहर थे। इसी बीच एक चमगादड़ घुस आया घर में लगा चक्कर काटने । गोल गोल। कभी ऊपर कभी नीचे । कभी दाएँ कभी बाएँ। वो अपनी जान बचाए।लड़ाकू जहाज़ की तरह श्युं श्युं। हम अपनी। भइया चिल्लाते जायँ “भाग रे बहिनी ! चमग़ुदरी ह चमग़ुदरी। बारे में चपक लेई।” हमलोग दोनों हाथों से जितना ढक सकते थे सिर को ढके इधर उधर अपना बचाव कर रहे थे। कहीं खटिया के नीचे कभी मेज़ के। कभी कुर्...