बिन पानी सब सून, घरथरी के बहाने, पर्यावरणीय चिंताएं
"घरथरी" क्या यह शब्द कभी सुना है आपने ? जो लोग पहले के होंगें और गाँव के कच्चे घरों में रहे होंगे , वो शायद जानते हों।कहीं कहीं इसे ‘’ घिरौंची ’’ भी कहते थे। पहले कुएं ही पानी के साधन थे , जिससे पानी काढ़कर घरों में ( कुंडा , ठील्ला और गगरी में ) भरा जाता था। किसी के यहां दो कुंडा , किसी के यहां एक कुंडा और एक ठिल्ला और किसी के यहां सिर्फ एक ही कुंडा। ( परानी यानि प्राणी ) सदस्यों मतलब औरतों की संख्या के हिसाब से पानी भरा जाता था क्योंकि पुरुष तो बाहर ही नहाते थे। पानी भरने का काम कहार करते थे और दोनों टाइम पानी भरते थे।कुएं भी दो प्रकार के होते थे , एक घिरनी वाले जिससे पानी खींचा जाता था और इसमें थोड़ी आसानी रहती थी लेकिन इस प्रकार के कुओं की संख्या कम थी ।ज्यादातर ( लिलारी ) मतलब सील , कुएं के एक किनारे लकड़ी का मोटा बीम रखा रहता कहीं - कहीं पत्थर का भी रहता था जिसके सहारे पानी काढ़ा जाता था। अ...