हम होंगे कामयाब
“अपराजिता” अमर उजाला की नारी सशक्तिकरण की इस मुहिम का केंद्र आज हमारा युवराज दत्त महाविद्यालय था। इतना समझ आया कि निरा भाषण दर्शकों और श्रोताओं को बाँधने में बहुत कारगर नहीं होते। क्यों न वो हमारे छात्र छात्रायें ही हों। आज नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम के दौरान ऐसा बारम्बार महसूस हुआ।जबकि एक अच्छा स्रोता होना कम क़ाबिलियत की बात नहीं। आपको बताऊँ!!दर्शकों की तीन श्रेणियाँ होती हैं. पहला,स्रोता. जो ध्यान से सुनता है। दूसरा - सरौता, यानि पूरे कार्यक्रम में कटर- पटर बोलता बातचीत करता रहता है. तीसरा- सोता , परम आनंद की स्थिति में सो कर कार्यक्रम का लाभ उठाता है। पहली श्रेणी में कम ही लोग आते हैं। ऐसे हालात हमें सिखाते हैं कि जब भी क्लास में हों, तब हमें अपने उबाऊ सेलेबस को रोचक बनाने की कोशिशें करते रहना चाहिए। चाहे जैसे। क्योंकि जितना ही बाहर का ज्ञान ज़रूरी है उतना ही किताबी ज्ञान भी। ख़ूब पढ़ें वो, ताकि हमारी बेटियाँ कुतर्कों की सही काट बता सकें। दूसरे सत्र में भाषण के बाद जैसे ही सुरक्षा टिप्स देने की बात शुरू हुई पूरा हाल लड़...