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Showing posts from September, 2019

कहावत

एक कहावत है भोजपुरी में “बइठल बनिया का करे, ए कोठिली क धान ओ कोठिली “ ये ससुरा के काम धाम तो हैं नहीं झुटे एक कोठली का धान दूसरे कोठली में करता रहता हैं इसी तरह की एक कहावत है कुमायूँनी क्षेत्र में जिसका अर्थ है। ब्वारी(बहू) के काम नाथिं(नहीं ) बल्दक (बैल) पूँछ कनया(खुजलाना) “ख़ाली बैठा आदमी क्या करे, बैल की पूँछ में खुजली” इसका प्रयोग कर हम लोगों ने आज प्रवेश के दौरान ख़ूब आनंद लिया। 19/07/2019 खाली बैठा बनिया बाट-बट्टा हारे। Kahawat ab badal gayee hai.Ab universal kahawat hai ki..... 'khali aadami kya kare Watsapp aur FB' हमारे मारवाड़ी में कहावत है खाली बैठी बहू के करे अट्ठे का बासन ब ठे धरे  ठाली ठुकरानी ने पेवली को चाव मतलब  सन्दूक में रखी साड़ी-कपड़े बार बार निकालना-जंचाना 😃

तुक्बन्दी

गाँव में बच्चे तुकबंदी करते थे।(हमारे ज़माने में) ”काली माई करिया, भगउती माई गोर। डीह बाबा लँगड, पुजारी बाबा चोर।।” बच्चे किस डीह बाबा को लँगड बनाते थे मालूम नहीं । बस तुकबंदी के पाठ में कभी हम भी सुर में सुर मिला देते थे। बात चली तो रेनू जी ने अपनी यादों का पिटारा खोला-- आपकी पोस्ट पढ़कर बचपन का वो जमाना याद आ गया जब गर्मियों की छुट्टियों में मैं भी परिवार और गांव के बच्चों के साथ ऐसी तुकबंदी खूब करती थी। एक मसला याद आ रहा है गांव में एक धनी थे जिनका लड़का रोज हमारे पेड़ से जामुन और आम तोड़ा करता था। एक दिन उसको हम सबने कु छ यूं परेशान किया --- ”धनी धनी धम धूसर  ऐसे धनी का लड़कवा मूसर  जैसे  बिरवा पर एक भूत बैठा  धनी कहय मेरा पूत बैठा  छप्पर पर एक सांप लोटय  धनी कहय मोरा बाप लोटय।  गली गली एक ----जाय धनी कहय मोरी बिटिया जाय।”  आज अक्सर ये तुकबंदी याद आती है जो बहुत ही सुखद अनुभूति के साथ बचपन के उस दौर में ले जाती है जहां सिर्फ खुशियां ही खुशियां थीं। एक्लव्य राय बताते है कि डीह बाबा वाली तुकबन्दी हमलोग भी खूब चिल्लाते थे ...