माँ के सच्चे दरबार की जय
माँ के सच्चे दरबार की जय।जय शेरा वाली। जय महिषासुर मर्दिनी। सारी रात जगराता चलेगा। फ़ुल साउंड, डीजे।खुली सड़क पर, टेंट लगा के। सड़क हमारी है , हम जो चाहे करें। हमारे सरकारी मकान की खिड़कियों दरवाज़ों की हर दराज से भक्ति आ ही जाएगी। सिर दर्द और दिल की धड़कन तेज़ होने तक। कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर कुछ आदेश जारी किया था। हम आदेश को फ़ाइलों में दबा के और भाषणों और समारोहों में जीवित रखेंगे। समाज सेवी मयंक श्रीवास्तव जी बताते हैं- इतिहास में जो समय मध्यकाल है वही हिंदी के इतिहास में भक्ति काल का है। भक्ति का इतिहास कितना पुराना है इसे बता पाना इसलिए कठिन है कि कोई लिखित इतिहास इन सन्दर्भो में नही है। भक्ति ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है । इधर दो दशकों से एक नई भक्ति उपजी है जो तेज़ आ वाज़ों सुंदर सजावटों और चन्दो पर आधारित है जिसमे बाजार की पूरी स्वीकृति है किताबे तस्वीर , गमछा, सुंदर लाइटे अच्छे टेंट यहाँ तक इवेंट ऑर्गनाइज़र इन कामो में लगे हैं किंतु भक्ति की आंधी के आगे सभी नतमस्तक है । इसमें कोई भी पन्थ किसी से भी पीछे नही और बाजार को चाहिए क्या एक नियंत्रित ...