बसंती रिबन

बसंती रिबन
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प्राइमरी स्कूल में वसंत पंचमी की पूजा  की तैयारी चल रही है
चौथे कक्षा की चार लड़कियाँ  रामा , मंजू, मोहसिना और नूतन चुनी गयी सस्वती वंदना के लिए .ट्रेनिंग और रिहर्सल चल रही है . मास्साब हारमोनियम पर धुन निकालते हैं

‘जयति जय जय माँ सरस्वती
जयति वीणा वादिनी।..
......
कमल आसन छोड़ दे माँ
देख मेरी दुर्दशा
शांत की सरिता बहा दे ,
हे कमलदल वाहिनी।।

पहला स्टेज शो.कुछ शरमाई, कुछ सकुचाई . लड़कियाँ वंदना याद करती हैं.
चारों लड़कियाँ जैसा बताया जाता है ,गाने के बोल शुरू करती हैं. क्लास के और बच्चे  लड़के और लड़कियाँ  मुँह ढक के मुस्कुराना शुरू करते हैं. नज़र मिलते ही राग बेसुरा और  गाती हुई लड़कियाँ भी शरमाते हुए चुप हो गईं.
डाँट पड़ी
-देखो ! गाते समय  किसी ओर न देखो.
बिलकुल सामने की दीवाल की ओर देखो.
-जी माटसाब
वंदना तैयार.
सबको साफ़ धुली स्कूल ड्रेस पहन के आना है और  दोनो चुटिया में  बसंती रिबन.
तब कहाँ पता था orange colour.
-जी मेरे  पास नहीं है  माटसाब. एक ने कहा .
-ठीक है  किनारे खड़ी दो लड़कियाँ  अपना काला रिबन और  बीच में खड़ी दो बसंती रिबन बाँध के आयेंगी.
हो गई तैयारी.

बसंती रिबन नहीं तो क्या.
न दीनता न बेचारगी.
आत्मविश्वास से भरपूर
चारों लड़कियों का मन बसंती था.
पहले स्टेज शो  देने की ख़ुशी में.

-नूतन

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