नाम के बहाने (1)


पापा ने कभी अपनी चारों बेटियों और एक बेटे का नामकरण कैसे हुआ इसकी बात बतायी थी।
बड़ी बेटी का नाम हमारे बाबा ने रखा 'बीना'।पापा को रानी पसंद था तो नाम के आगे रानी भी लगा दिया'बीना रानी'
एक्ट्रेस रेखा से प्रभावित होकर पापा ने दूसरी बेटी का नाम रखा, 'रेखा' और रानी भी जोड़ दिया ।बन गया 'रेखा रानी'।
तीसरी मैं ,'नूतन' से प्रभावित होकर ,पर जाने कैसे रानी नहीं जुड़ा। मेरा घर में बुलाने का नाम बड़ी दीदी ने रखा 'बेबी'।
चौथे नंबर पर भाई के घर का नाम अम्मा ने रखा 'मुन्ना'। जब कि स्कूल के लिए 'बृजेश'। बाद में किसी ज्योतिषी के बताने पर 'प्रेम प्रकाश' हुआ।
सबसे छोटी 'सीमा'।
भाई बहनों की सीमा-रेखा।
मेरे किसी क्लास में विष्णु प्रभाकर की 'सीमा-रेखा' एकांकी पढ़ाई जाती थी। उस समय मैं समझ नहीं पाती थी कि मेरी बहनों के नाम पर ये कैसे लिखा गया। बहुत बाद में समझ आया सीमा- रेखा का अर्थ।
मुझे शुरू में अपने दोनों ही नाम अच्छे नहीं लगते थे। वजह थी हमारे प्राइमरी स्कूल के साथियों की तुकबंदी। बोलते थे,
'बेबी जलेबी चार आना पउवा'(याद आया अब तो चार आना 'चवन्नी'भी खत्म हो गया)
इसी तरह 'नूतन' की भी चिढाने वाली तुकबंदी। एक हमारे गुरूजी थे वो हमेशा ' नूतन-पुरातन' ही बुलाते थे। पर
समय के साथ हमें अपना नाम बेहद पसंद आने लगा। लोग कहते हैं नाम में क्या रखा है,लेकिन मैं कहती हूँ बहुत कुछ।हर नाम के पीछे कोई न कोई कहानी होती है।अनायास नामकरण होने की भी कहानी होती है।
अपने नाम के पीछे की कहानी क्या है जरूर जानिये।
अम्मा पापा भाई बहनो की यादगार फ़ोटो ।जो गाँव के एक जलसे में एकत्रित होने के दौरान ली गई थी।


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