दिल के तार
होली की बधाई दिल से
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होलिका की सुबह सुबह बड़े भाई साहब का फ़ोन आया . हाँ कैसे हो तुम लोग ? बहुत दिनों से कोई हालचाल नहीं मिला.
यहाँ सब ठीक है भाई साब . तीन चार दिन से सोच रहा था फ़ोन करने को. और?????
आप की तबियत कैसी है?भाभी ठीक हैं न.घर में सब ठीक है न?
-हाँ सब ठीक है . बच्चे आ रहे हैं न त्योहार पर?
-हाँ आज आ जाएँगे.
-ठीक है
-आप लोगों को कई दिन से याद कर रहे थे,पर बच्चों की फ़िकर और नौकरी के झमेले में रह गया,फ़ोन करना.
-होली बाद गाँव जा रहे है . फलाने की शादी में.
-ठीक है. अगर मेरी ज़रूरत महसूस करिएगा फ़ोन करिएगा आप . सब काम छोड़ के पहुँच जाएंगे.
आँख के गीले होते कोर के साथ आवाज भर आयी. फ़ोन कट गया.
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प्यार में भीगे बधाई के रंग
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