रास्ता उधर से
हम छोटे शहर के लोग वीवीआईपी के आने जाने से कभी कभी ही प्रभावित होते हैं.इसलिए आदत नहीं है.कहीं जाम लग जाय तो चाहे रास्ता बदल लेते हैं.अचानक रूट डायवर्ट कर दिया जाएगा ऐसा अंदेशा नहीं रहता.
हम चौपहिया से अपनी गति से बढ़े चले आ रहे थे. अचानक मूँगफली तोड़ते दो पुलिस वर्दीधारी गाड़ी रोकते हुए इशारा करते हैं इधर से नहीं . गाड़ी धीमी करते हुए पूछा क्यों भाई क्यों.
-इधर से नहीं जा सकते.
-भाई इधर ही जाना है , थोड़ी दूर. कालेज तक.
-नहीं नहीं.
-क्यों नहीं जा सकते ?
-बारात आनी है.
-बारात? आने दो हम साइड से निकलेंगे.
-कहा न,नहीं जा सकते.
-किसकी बारात है?
-शंकर भगवान की.
-शंकर भगवान की??अब क्या बोलते.
योगी शिव की बारात निकलनी है. शंकर जी के बरातियों को देखकर जब उनके ससुराल वाले ही शादी करने से इंकार करने वाले थे दुखी थे कि गौरा पार्वती किसके साथ जा रही है. हम अपनी गौरा का ब्याह ऐसे अघोरी से नहीं करेंगे.भोजपुरी गीतों में बहुत से प्रचलित गीतों में गाया गया है-
-इधर से नहीं जा सकते.
-भाई इधर ही जाना है , थोड़ी दूर. कालेज तक.
-नहीं नहीं.
-क्यों नहीं जा सकते ?
-बारात आनी है.
-बारात? आने दो हम साइड से निकलेंगे.
-कहा न,नहीं जा सकते.
-किसकी बारात है?
-शंकर भगवान की.
-शंकर भगवान की??अब क्या बोलते.
योगी शिव की बारात निकलनी है. शंकर जी के बरातियों को देखकर जब उनके ससुराल वाले ही शादी करने से इंकार करने वाले थे दुखी थे कि गौरा पार्वती किसके साथ जा रही है. हम अपनी गौरा का ब्याह ऐसे अघोरी से नहीं करेंगे.भोजपुरी गीतों में बहुत से प्रचलित गीतों में गाया गया है-
“अइसन सिव से हम गौरा ना विहबै हो सिव संकर भोले,
भले गौरा रहिहैं कुँवारि हो सिव संकर भोले”
लेकिन जब पार्वती ने ही शिव को चुना है फिर क्या.शिव तो भोलेनाथ हैं. नीलकंठ हैं. आशुतोष हैं, विश्वनाथ हैं.
आज कंकर कंकर शंकर हुआ जा रहा.हम तुच्छ उनके आगे क्या हैं. मुड़ा लिया जाय गाड़ी भाई.आज रास्ता उधर से है.
#जय हो दिगम्बर
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