यादों की गलियों में मीरजापुर


बचपन का Rainy day यानी मौज़ मस्ती का दिन। स्कूल गए और छुट्टी। न छाता न रेनकोट। पानी में भीगते छाई छप्प करते घर वापस।

याद आता है मिर्ज़ापुर का पक्के घाट।
हम दूसरी जमात में पढ़ते थे। हिन्दू बालिका विद्यालय,मिर्ज़ापुर। थोड़ी ही दूर पर  बहती थीं गंगा नदी - और था पक्के घाट। रेनी डे  पर हाफ़ डे के बाद स्कूल में छुट्टी कर दी गई| घर में तो बाद में पता चलेगा। हम लोग कुछ दोस्त  टिफिन (पराठा और आम के अचार) के साथ पहुँच गए पक्के घाट । उस समय घाट की सुंदरता में बहुत ऊंचाई पर  दोनों और  हाथी बने हुए थे। किसी ने बताया जब हाथी की सूड़ तक गंगा का पानी आ जायेगा तो मिर्ज़ापुर डूब जाएगा, कितना सही था कितना नहीं। पर इस बात से हम लोग जरूर रोमांचित हो जाते थे ।

पक्के घाट इसलिए भी जाना पहचाना था की कार्तिक महीने में हम लोग अलस्सुबह उठकर गंगा नहाने जाते थे। अम्मा ,दीदी,आस-पड़ोस की चाची और कभी कभी मैं भी। रात में ही तय हो जाता था ,सुबह गंगा नहाने जाना है।
आज से लगभग 44 साल पहले।तब गंगा इतनी मैली नहीं थी।
-अब पक्के घाट कैसा है पता नहीं।

आज दिन भर  रुक रुक के
बारिश हुई। मैंने अपने कैंपस में खर पतवार की सफाई के लिए मज़दूर लगाया था। और बार बार मन में आ रहा था।
Rain rain go away
Come again another day.

#where is my happiness
अगस्त २०१८








यादों की गलियों में आज फिर मीरजापुर  घूमने लगा ।

मीरजा मतलब लक्ष्मी।
आप मिर्ज़ापुर भी बोल सकते हैं।
ब्रिटिश काल में व्यापारिक दृष्टि से फलता फूलता शहर। आज कालीन उद्योग के लिए विख्यात है। यहां हिंदुओं के तीर्थ विंध्याचल और अष्टभुजा हैं और पिकनिक स्पॉट विंढम फॉल, लखनिया दरी ।18वीं शताब्दी में यह बनारस ज़मींदारी का हिस्सा था।

यहीं पर पहली बार सिनेमा देखा सिनेमाहाल में जाकर।सन् 1972 - 73 में।
उस समय नया नया सिनेमाहाल बना था। नाम था-'तुलसी चित्र मंदिर। घर से ज्यादा दूर नहीं था। पापा की  हिदायत थी की बच्चे धार्मिक सिनेमा देखेंगे सो हम लोगों ने उसी में जाके व्वो बड़े से पर्दे पर देखा- हरि दर्शन ,भक्त प्रह्लाद और अखंड रामायण। पूरा सिनेमा देखा कि बीच में ही सो गए याद नहीं ।लेकिन सिनेमा जाने के पहले की जो ख़ुशी थी वो अब भी जेहन में है। इन तीनों में अगर कुछ याद है तो वो है-नारद का चरित्र जो मन के पटल पर छप गया ।और  डाय्लाग बोलो नारायण नारायण।

हमने गूगल पर सर्च किया ' तुलसी चित्र मंदिर, ढूँढने पर भी नहीं मिल रहा।
सितम्बर २०१८

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