ईद मुबारक
इस मौके पर हमें हमारी एक दोस्त याद आती है मोहसिना खान। जिसके साथ हमने 2दर्जे से लेकर 5वीं तक की पढ़ाई उतरौला के 'नार्मल' स्कूल में की। हमारी अच्छी बनती थी। मोहसिना के पापा डॉक्टर थे। हमारे पापा नायब तहसीलदार। उसके आम के बाग़ थे कच्ची अमिया लेके वो स्कूल भी आती थी । हम सब मिल कर चटकारे लेते थे। उस स्कूल में हमारे धोबिन, जमादारिन, कहारिन की बेटी-बेटे सभी बिना किसी भेदभाव के एक साथ एक क्लास में पढ़ते थे । फीस थी 3 पैसे। जो प्रत्येक माह की 15 तारीख को जमा होती थी। लड़के और लड़कियां साथ ही पढ़ते थे। मोहसिना पढाई में हमसे अव्वल थी ।खासकर गणित में।
1977 के बाद पापा का तबादला हो गया । हम बलरामपुर से होते हुए। यहाँ आ गए। तब से अब तक हम कहाँ वो कहाँ। एक दूसरे की कोई खबर नहीं।
शायद वो भी मुझे याद करती हो।
25 june 2017
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