यादों के मनके/ rare pics

आज हर बात पे फ़ोटो,और सेल्फी
हंसने ,रोने नाचने ,गाने की
पढ़ने की ,पढ़ाने की
आने की,जाने की
ताल,तलैया,नदी की,
पेड़ की पौधोे की
हवा की पानी की।
कुत्ते की,बिल्ली की
सबकी फ़ोटो।
हर उस चीज़ की जो कैमरे में लाने को हम तत्पर हैं
हमें जल्दी है सबको दिखाने की ।
सबका सबूत।
वैसे हम लोग अंग्रेजों के जमाने के तो नहीं हैं पर उस जमाने के जरूर हैं जब फ़ोटो लेना एक उत्सव हुआ करता था।
ग्रुप फ़ोटो होनी है तो बाकायदा फोटोग्राफर से मीटिंग तय की जाती थी सब लोग समय से तैयार रहते थे।फोटोग्राफर बोलता था।
-मुस्कुराइये !
-ये तो दाँत दिख गए
-इतना नहीं
-थोड़ा कम
-हां अब ठीक है क्लिक।
-फ़ोटो हो गई
अकेले की पहली फ़ोटो 10वीं की परीक्षा में बोर्ड का फार्म भरने के लिए खिचते थे,पासपोर्ट साइज़।।
जबकि पासपोर्ट अब जाके बना है और विदेश यात्रा ???
अभी भी नहीं हुईं।
कभी कभी स्टूडियो में जाके भी फ़ोटो खिचवाते थे।
स्टूडियो वाला हाथ में गुलदस्ता पकड़ा देता या फिर बैठने की स्टाइल बताता और फिर एल्बम में फ़ोटो सुरक्षित हो जाती।
फ़ोटो देखना दिखाना भी मनोरंजन का साधन होता था।
धीरे-धीरे घर में छोटे कैमरे आ गए।घर में टीवी आई तो सबने टीवी के साथ भी फ़ोटो खिंचवाई।
मेलों में भी फोटो खीचने वाले होते थे। एक बार गोन्डा जिले तुलसीपुर (अब बलरामपुर जनपद में) के पाटन मेले में हम भाई बहनों ने नकली ताजमहल के सामने बैठकर फ़ोटो खिंचवाई।और खुश इतने जैसे असली ताजमहल के सामने बैठे हों। शायद याद में पहली फ़ोटो ली गई थी। उसकी कतरन घर में किसी के पास होगी।
पुरानी फ़ोटो से जुडी सभी यादें मीठी ही हैं।
उतरौला में घर पे फोटोग्राफर बुला के ली गई ग्रुप फ़ोटो इसमे मैं भी हूँ।एक बात याद आयी कि तैयर होते समय दीदी लोगों ने माला पहन रखी थी। मेरा मन भी माला पहनने का था किन्तु मुझे बहका दिया गया कि तुम्हारे कुर्ते में तो वैसे ही माला बनी है।फिर भी फोटो खिंचवाने की खुशी इतनी थी कि मैने माअला पाहानने की जिद नहीं की।
घर के लोगों के अलावा पापा के अर्दली और पंखाकुली भी  साथ में। उनकी इच्छा बी रही होगी।
# बस यूँ ही।
#Rare photo

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