डिग्री शिक्षक।

प्रधानमंत्री की योजनाओं एवं भाषणों में शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है ।'मन की बात' स्कूली बच्चों से रेडियो के माध्यम से साझा की जा रही है किंतु वास्तविकता के धरातल पर कुछ और ही दिख रहा है।
शिक्षा व्यवस्था का स्वास्थ्य दिन-ब- दिन खराब होता जा रहा है। शिक्षक विहीन शिक्षा या दिहाड़ी शिक्षक के सहारे 'सब पढ़ें सब बढ़ें' के नारे को सार्थक बनाने की निरर्थक कोशिश हो रही है।नतीजा सबके सामने है।सरकार की मंशा शिक्षकों को आंदोलन में लगे रहने देने की मालूम होती है।
शायद!! मंहगाई की मार शिक्षकों पर नहीं पड़ती और उसका स्वास्थ्य भी खराब नहीं होता। बिना LTC के उसको अपने खर्चे पे दुनिया घूमनी है और travelogue लिखना है।जॉब मिलने के बाद भी अपने संसाधनों से शोध-पत्र लिखने हैं।प्रमोशन के लिए API जुटानी है। हमारे शिक्षा मन्त्री का ऐसा मानना है कि शिक्षक कुछ नहीं कर रहा। शिक्षक क्या करे,क्या न करे की मुश्किल में गोते लगा रहा है।
सातवां वेतनमान देना तो दूर ये तक नहीं बताया जा रहा कि सातवे वेतनमान के लिए गठित चौहान समिति की शिफारिशें क्या हैं ।

#हमारी मांगें पूरी हों।
#डिग्री शिक्षक।


Vijender Masijeevi ने बड़ी लड़ाई को इतनी सरलता से समझा दिया है,उन्हीं के शब्दों में
यदि कोई सरकार अपने विश्वविद्यालयों की सुविधा और तनख्वाहों के लिए जरूरी पैसा देने के लिए मना कर दे और शर्त रखे कि पैसा केवल कर्ज़ के रूप में दिया जा सकता है जिसे जाहिर है वापस करना पड़ेगा, इसके लिए बाकायदा एक साहूकारी एजेंसी HEFA का गठन किया जाए, क्या तब भी आपकी आंखें नहीं खुलेंगी? पूरे बजट को ही गिलोटिन कर देने वाली सरकार क्यों नहीं छिपाना चाहेगी कि शिक्षा पर वास्तविक व्यय कम किया जा रहा है। लड़कियों, गरीबों, दलितों को शिक्षा से वंचित करने की इस मंशा के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक 19 तारीख से  23 मार्च  2018  तक हड़ताल पर हैं। 
#DU शिक्षक 

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