पुल पर उतरता है बसंत धीरे-धीरे
हम साफ़ सुथरा शहर चाहते है। अपन का शहर। स्वच्छ शहर। स्मार्ट शहर।
पर एक यक्ष प्रश्न यह है कि साफ़ होगा या रहेगा कैसे।
मार्च का आख़िरी हफ़्ता । अचानक कहीं डेंटिंग पेंटिंग होते दिखना कोई आश्चर्य की बात नहीं। एक जगह दिखा ओवर ब्रिज की बाउंड्री दीवार पर ज़ेब्रा टाइप वाली पट्टियाँ रंगी जा रही हैं ।
तीन लड़के हैं । निर्विकार भाव से। जल्दी जल्दी बिना रुके काम निपटाते हुए।
एक के हाथ में लोहे की पत्ती है जिससे वह दीवार पर चिपके पैम्फ़्लेट खुरच के छुड़ा के एक कपड़े से झाड़ दे रहा है। नीचे तरह तरह के विज्ञापन के फटे नुचे काग़ज़ के टुकड़े बिखरे पड़े हैं।
दूजे के हाथ में सफ़ेद पेंट का डिब्बा और ब्रश है। उससे वह सफ़ेद पट्टी पेंट कर दे रहा है।
तीसरे के हाथ में काले पेंट का डब्बा और ब्रश। उससे वह पीली पट्टियों को काले रंग से पोत रहा है।
कल तक पेंट हो के ओवरब्रिज कुछ चमकने लगेगा।
हम क्या करेंगे?
अव्वल ,गाड़ी से चलते हुए पान या गुटका की पीक को उसी दीवार पर पीक के कहेंगे ।
“यार ययु तो बड़ा खबसूरत लगि रहा।”
दूसरे, किसी कोचिंग या और स्टार्ट अप वाला ,कारोबारी मालिक दो हज़ार रुपए और दो हज़ार पमफलेट दो लड़कों को पकड़ा के कहेगा इसको जहाँ जगह मिले , चिपका आए ।
अब रातों रात जब सड़कें सूनी होने लगेंगी , दो लड़के निकलेंगे।एक लड़का डब्बे में गोंद और ब्रश लिए दीवारों पर ब्रश मारता जाएगा और दूजा पम्पलेट चिपकाता जाएगा।
जगह जगह दिखेगा कचनार कोचिंग, सेमल कोचिंग , गुलमोहर कोचिंग , जेजे जादूगर शो, फ़ैशन बुटीक, वग़ैरह। पूरे शहर में बसंत उतर आएगा। नए बैच शुरू। पहले आयें पहले पाएँ । विशेष छूट, के पोस्टर।
लड़के हिसाब देंगे ।
पचास- पार्क की दीवार पर
पचीस - टीचर कालोनी के पिछवाड़े
पचास-ओवर ब्रिज की दीवाल पर
तीस-बस स्टेशन पर
दस- चौराहे की दीवाल पर
पचीस - डिग्री कलेजी के फाटक पर
पचीस- इंटर कालेज के फाटक पर
बीस- बिजली के खम्भों पर
पचीस - जुम्मन के शटर पर
दस- महेस पान की गुमटी पर
मालिक निकलेंगे देखने ।लाल, हरे ,बैगनी , बसन्ती , काले , नीले ,पीले सभी रंग के काग़ज़। हर दर-ओ -दीवार पर अपने पम्प्लेट देख के उनकी आँखों में भी बसंत उतर आएगा।
हो गया स्वच्छ,चमकदार, रंगबिरंगा , अपना शहर।
# सुझाव
नम्बर एक- भारतीय वाहनों में पीकदान या उगालदान का फ़ीचर ज़रूर जोड़ा जाय।
नम्बर दो- कोस कोस पर थूकदान रखे जाँय।
नम्बर तीन-पोस्टर और पमफलेट के लिए भी जगह निश्चित की जाय।
आपके सुझाव आमंत्रित हैं
शानदार लिखा है मैम आपने।
ReplyDeleteभारतीय निगम बसों,निजी बसों और रोडवेज बसों में पान गुटखा के लिए pot लगवाने के साथ साथ चिप्स,नमकीन कोलड्रिंक के बॉटल आदि के लिए भी डस्टबिन लगवाए जाएं।और सख्त कानून बनाया जाए कि अगर कोई भी यात्री कचरे को इधर उधर फेक रहा है तो उसपर निश्चित आर्थिक दंड भी लगाया जाना चाहिए।
इसको सफल होने पर सरकार बड़े पैमाने पर इसको लागू भी कर सकती है, और हर यात्री स्टेशनों पर इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा सकते हैं।
Thankyou Rajesh
Deleteसाफ़-सफ़ाई उत्तरप्रदेश बडा विपरीत परिस्थितियों का संजोग है
ReplyDeleteचाह होने पर राह निकल आयेगी
Deleteसाफ़-सफ़ाई उत्तरप्रदेश बडा विपरीत परिस्थितियों का संजोग है
ReplyDeleteहमारी कोशिश से परिवर्तन आएगा
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