नुस्खे क्लीन इंडिया के

मुझे भी पसंद है स्वच्छ वातावरण
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आपको नापसंद हो ऐसा हो नहीं सकता। वैसे सच पूछा नहीं सच कहा जाय तो किसे नहीं पसंद है साफ़ सफाई,किन्तु गन्दगी हमारी मजबूरी है। खासकर शहरों में।जगह जगह बजबजाती नालियां,कूड़े के ढेर,उसमें खाने की तलाश करते-घूमते आवारा जानवर।और सब पर भारी पॉलिथीन।
लाइलाज बीमारी की तरह चारों ओर फैली रहती है।
तरह तरह के लोग,अनेकों संस्थाएं अपने अपने तरीके से स्वच्छ्ता के लिए सबको जागरूक करने में लगी हैं। बिना कूड़ा करकट वाली जगहों पर झाडू हाथ में ले के फ़ोटो खिचाना आम बात हो गई है।
आप ही बताएं जब आप घरेलू साफ़ सफाई में लगे हों तो क्या आपकी सूरत फ़ोटो खिंचवाने वाली होती है? नहीं न।फिर वो कौन सी जरूरत है जो हमें झाड़ू ले के फ़ोटो सेशन करवाने को बाध्य करती है।
अगर सफाई हुई भी तो कूड़ा एक जगह से हटा कर दूसरी जगह कर दिया जाता है।निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है।
पूरा सितम्बर स्वच्छता पखवारा ही चल रहा है।विभिन्न योजनाओं से 2अक्टूबर तक भारत चमाचम हो जाएगा।!!!शायद।
शिक्षण संस्थाओं में बच्चे इस कार्य में बाखूबी लगाए जाते हैं।सफाई कर्मियों के अधूरे काम बच्चे पूरा करते हैं। क्या संस्थाओं के पास साफ़ सफाई का कोई फण्ड नहीं होता या जरूरत से कम होता है ?अगर ऐसा है तो PM,CM को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पर खर्च बढ़ाना चाहिए।
सरकारी प्रयासों से अलग अपने पर्यावरण को साफ़ रखने की छोटी छोटी कोशिश मैं भी करती हूँ। अच्छा लगे तो आप भी करिये। मुश्किल नहीं है-
-खरीददारी कपड़ों के बैग में करिये।
-पॉलिथीन का इस्तेमाल कम से कम।
-पूजा पाठ की सामग्री और मूर्तियां नदी में प्रवाहित न करके मिट्टी में दबाइये।
कूड़ा इधर उधर न फेंकिए।
-पेड़ पौधे लगाते और बचाते रहिये।
और हाँ।
सफाई के लिए हमेशा सरकार की तरफ ही न देखिये।
#नुस्खे क्लीन इंडिया के।

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