बहुत कठिन है डगर
बहुत कठिन है डगर
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अलस्सुबह लखीमपुर से लखनऊ जाना और वापस देर शाम तक लखनऊ से वापस आना।इस बीच हर बार जो दृश्य कॉमन है वो है शौच के लिए जाते-स्त्री,पुरुष और बच्चे।
अगर बहुत उजाला नहीं है तो सड़क किनारे उकड़ूँ बैठे ही मिल जायेगें।
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अलस्सुबह लखीमपुर से लखनऊ जाना और वापस देर शाम तक लखनऊ से वापस आना।इस बीच हर बार जो दृश्य कॉमन है वो है शौच के लिए जाते-स्त्री,पुरुष और बच्चे।
अगर बहुत उजाला नहीं है तो सड़क किनारे उकड़ूँ बैठे ही मिल जायेगें।
अगर उजाला है तो लोटा या प्लास्टिक की बोतल हाथ में लिए आते- जाते दिख जायेगे।
नंग धड़ंग बच्चे बाकयदा शौच क्रिया से बेवरवाह आनंद लेते दिख जाते हैं।अगर दो चार बच्चे अगल बगल बैठे हैं तो वहीं बैठे-बैठे ही वो किसी चर्चा में भी मशगूल रहते हैं।
नंग धड़ंग बच्चे बाकयदा शौच क्रिया से बेवरवाह आनंद लेते दिख जाते हैं।अगर दो चार बच्चे अगल बगल बैठे हैं तो वहीं बैठे-बैठे ही वो किसी चर्चा में भी मशगूल रहते हैं।
हम ये सोचते हैं कि जब शहरों के किनारे बसी आबादी का ये हाल है,तो जो सुदूर क्षेत्रों में होंगे वहाँ क्या हाल होगा।
ODF खुले में शौच मुक्त भारत कब तक हो सकेगा।
फिलवक्त तो मुझे नहीं लगता।
ODF खुले में शौच मुक्त भारत कब तक हो सकेगा।
फिलवक्त तो मुझे नहीं लगता।
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