अपना घर
अपना घर वो है जहाँ
अधखुली आँखों से बड़े सवेरे
गिरते -पड़ते ,अलसाए से,
पहुँचें गुसलखाने
और बिन खोजे,उँगलियाँ पहुँचें टूथब्रश पर
अपना घर वो है .
अपना घर वो है
जहाँ चौके की खिड़की से देखते हुए
बाहर की हलचल,
सफ़ाई वालों का सड़क बुहारना
कुत्तों का टहलना,
घरों में जाती कामवाली बाइयों की चाल,
पार्क की चहलपहल
रिक्शे की खड़ खड़,
दुपहिया, चौपहिया के हार्न
सुनते हुए गैस पर चाय का पैन चढ़ाया जा सके
अपना घर वो है.
अपना घर वो है.
अपना घर वो है
जहाँ अलस्सुबह कुछ गिरने की
जानी पहचानी आवाज के साथ समझ आए,
अख़बार है.
जानी पहचानी आवाज के साथ समझ आए,
अख़बार है.
प्याली से चाय पीते,
अख़बार पढ़ते,
चिड़ियों की चहचआहट
और
फ़ेरी वालों की आवाज़ सुनते हुए
चाय ख़त्म की जाय
अपना घर वो है.
अपना घर वो है.
होटल के कमरे की सुबह
अजनबी कमरों की सुबह
गेस्ट हाउस की सुबह
दुनिया,जहान,कहीं की सुबह
नहीं होती उसमें ख़ुशबू घर की.
अपने इस साम्राज्य को
नहीं चाहतीं छोड़ना
हम औरतें
और कहती हैं
चौके से फ़ुरसत नहीं मरते दम तक
Comments
Post a Comment