गिलहरी

तू चल मैं आता हूँ।
चुपड़ी रोटी खाता हूँ।
ठंडा पानी पीता हूँ।
हरी डाल पर बैठा हूँ। पहली बार इसी कहानी में उससे पहला ,नजदीकी रिश्ता बना था।
ना ना कौवे की कहानी नहीं ।
कहानी है
चुटकाइल,चेखुर,रुक्खी की
 फ़ेसबुक  से ये पता चला की अपनी गिलहरी के ये सब नाम भी हैं। हमारे गांव में भी इसे ’चेखुर’ कहते हैं।
इन्हें फुदकते हुए वैसे तो हमने कई बार देखा है। घर के सामने पीपल का पेड़ है। उस पर गिलहरियों का परिवार रहता है और जब तब इनकी छुपन छुपाई ,पकड़म पकड़ाई के खेल देखने का मज़ा मैं भी लेती रहती हूँ।
आज  इनकी ख़ास कलाबाज़ी देखने को मिली । हमने देखा एक गिलहरी ने खूब लंबी छलांग लगाई जैसे बन्दर लगाते हैं। दीवाल से पेड़ की ऊँची टहनी पर।
मेरे मुह से अचानक निकल पड़ा, वाह। एक छण को लगा जैसे मैं कॉलेज का कोई स्पोर्ट्स इवेंट देख रही होऊं।
मज़ा आ गया।
(शलोम) पढ़ने के लिए
कल से इस हिब्रू शब्द की जानकारी हुई ।अच्छा लगता है बोलने में।
6 जुलाई 2017

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