शरद पूनम

खीर-पूड़ी भारतीय जनमानस में गहरे से बसा है .
ज़्यादातर तीज त्योहार पर खीर
शादी ब्याह हो, खीर
नई बहू घर आ रही हो बखीर
बच्चों का जन्मोत्सव खीर
अन्नप्राशन हो खीर
व्रत में मख़ाने-मेवे की खीर
खीर-बख़ीर में बहुत मामूली फ़र्क़ है.सिर्फ़ गुड़ और चीनी का.
"खीर बनाइए और खाइए" ऐसा संदेश अगर कभी बहुत प्यार से कहा गया हो ऐसे मौक़े दो ही याद आते हैं|
एक स्काउट के कैम्प में स्कूल में| हम लोग ख़ूब उत्साह से गाते थे |
ऐसी खीर पकाइए ,
सारे मिलकर खाइए
कौन खाएगा चमचा नाल
हम खाएँगे चमचा नाल
चमचा चमचा चमचा चमचा
चमचा चमचा खाइए
ऐसी खीर पकाइए सारे मिलकर खाइए
दूसरा मौक़ा आज है
आप सभी खीर बनाइए
रात में खाना खाने के बाद सोने मत जाइए .
घर से बाहर निकल कर चाँदनी को निहारिए.
दूध जैसी,धवल ,स्वच्छ , चाँदनी .
पर्यावरण बचाने की फ़िक्र में आज रात स्ट्रीट लाइट या घर के बाहर की लाइट बंद कर के देखिए
ख़ूब उजाला रहेगा.
प्रकृति के रहस्यों को वैज्ञानिक खोजें. आप सिर्फ़ और सिर्फ़ आनंद लीजिए ,चाँदनी का,खीर की मिठास के साथ .
#शरद पूनम की बधाई

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