उच्च शिक्षा का नमूना-३
परीक्षा शुरू होने के पहले एक लड़का कर्मचारियों से उलझा हुआ था।
मेरी सीट क्यों नहीं लगी है कमरे में. रोल नम्बर नहीं मिल रहा है।
अपने साथ स्कीम की एक कॉपी भी लिए था . दिखाया, देखिए आज मेरा पेपर है.
कर्मचारी ने बताया भाई ये परीक्षा कल हो चुकी है। वो लड़का उलझता रहा. उसकी परीक्षा छूट गई थी ,सो वह हैरान-परेशान.
स्कीम ले के ज़रा ध्यान से देखा गया तो स्पष्ट हुआ कि वह पिछले वर्ष की स्कीम डाउनलोड करवा लाया था.
यहाँ झोल उच्च शिक्षा व्यवस्था में है या डिजिटल इंडिया में? या फिर कौशल विकास में?
सवाल क़ाबिल-ए ग़ौर है.
इसी बीच ख़बर आयी कि एक विश्वविद्यालय के स्नातक कक्षाओं के प्रश्नपत्र में सेलेबस से बाहर का प्रश्न पूछे जाने से छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया।
जहाँ इस बात से राहत महसूस किया गया कि कम से कम छात्र अपना सेलेबस जानते हैं, वहीं इस बात से पुनः मन में सवाल कौंध गया कि चूक कहाँ होती है ? शिक्षक और अधिकारियों से ये लापरवाही अक्सर क्यों हो जाती है.
अत्यंत दुखद है मैम छात्र की इस अनभिज्ञ ता पर कमी इस लचर व्यस्था की है
ReplyDeleteजहां न्यू चीजें समय पर अपलोड भी नहीं की जाती
ReplyDeleteOr कुछ हद तक इसके जिम्मेवार अभिभावक भी हैं
ReplyDeleteबिल्कुल सही कह रहे हो. राजेश
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