एक दिन बचपन के नाम


एक दिन बचपन के नाम
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एक बात बतायें आप, यदि किसी छोटे बच्चे की उम्र पता करनी हो तो आप कैसे जान पाते हैं कि बच्चा लगभग पाँच साल या उससे अधिक का है।
हमें उम्मीद है इसमें हमारे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों से जुड़े लोग आसानी से बता पाएँगे। 
हमें कल यह ज्ञान मिला।
मौक़ा था एनएसएस कैम्प के दौरान एक प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालय (बीआर सी छाऊँछ) के बच्चों और अर्चना जी और गीता जी जैसी शिक्षिकाओं से मिलने का।बातचीत में पता चला कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने ख़ातिर कुछ ग़रीब मातापिता अपने अत्यंत छोटे छोटे बच्चों का नाम भी स्कूल के रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहती हैं।
कहती हैं-“ इय्यू देखो दीदी ,लरिकवा कान पकरि लेत है”
उसके पीछे उनका उद्देश्य पढ़ने भेजना नहीं है।अपितु मुफ़्त में सब कुछ पाना है। अभी कल ही देखा कि सोलर लैम्प लेने के लिए एक महिला लड़ने की हद तक प्रधानाचार्य से उलझी पड़ी थी।
कोई जन्मतिथि का प्रमाण न होने पर प्रधानचार्य के पास देशज तरीक़ा होता है ये उम्र नापने का पैमाना।
कल बच्चों के साथ पढ़ने पढ़ाने ,खेल कूद करवाने बच्चों से बातचीत करने , और छुकछुक रेलगाड़ी के रंग में रंगे स्कूल में फ़ोटो खिचवाने का बढ़िया मौक़ा मिला।
अभी भी एक्कट दुक्कट, गेंद ताड़ी, बर्फ़ पानी खेलते बच्चों के चहचहाने से स्कूल गुंजार था।
(यदि बच्चा सिर के ऊपर से हाथ ले जा कर दूसरी ओर का कान पकड़ ले तो मान लिया जाता है कि वह पाँच साल का हो गया है)
१३/०२/२०१९

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