डिजिटल इंडिया

राम चन्द्र कह गए सिया से,एक दिन कलयुग आएगा,
हंस चुगेगा दाना तिनका,कौवा मोती खाएगा |

 सभी मैनेजर जानकार हों  हर तरह के बैंकिंग मामले के , हमेशा सच नहीं होता।
एक वाकया है। नए ATM कार्ड का नया पिन बनाना था। पहुँच गए  नज़दीकी ए टी एम । यही कोईपाँच बजे का समय। एक दो कोशिश के बावजूद  हम नाकाम रहे  पिन जेनरेट करने में । तभी भारी नक़दी के साथ मैनेजर पहुँचे । बोले आप उधर बना लीजिए । हमें कैश भरना है। हम लोग हट गए ।  थोड़ी देर में शटर उठा । उनसे पूछा। क्या करें। वो अंदर लिखे इन्स्ट्रक्शन पढ़ते रहे  । फिर कहे अरे फ़लाँ लड़का बता देगा।
थोड़ी देर में ही  बैंक में दिहाड़ी पर काम करने वाला लड़का आया और फटाफट बताया-
ये ये ये ये । लो बन गया पिन और  पाँच सौ  रुपए निकाल कर तस्दीक़ भी कर लिया कि सही काम कर रहा है पिन।
ये फ़र्क़ है थ्योरी और प्रैक्टिकल का।

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