करें योग रहें निरोग
योग
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गणित चाहे जितनी कमज़ोर हो आपकी पर प्रकृति से जोड़ घटाव (योग संयोग) करते चलिए।
कम मौक़े मिलते हैं जब हम खिल कर हँसते हैं। उन्मुक्त हँसी हमारे शरीर में बन रही गाँठों को खोल देती है। लचीलापन हड्डियों की कड़क मिज़ाजी को कम करता है।
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गणित चाहे जितनी कमज़ोर हो आपकी पर प्रकृति से जोड़ घटाव (योग संयोग) करते चलिए।
कम मौक़े मिलते हैं जब हम खिल कर हँसते हैं। उन्मुक्त हँसी हमारे शरीर में बन रही गाँठों को खोल देती है। लचीलापन हड्डियों की कड़क मिज़ाजी को कम करता है।
प्रकृति के विभिन्न रूपों को धरते (सर्प भुजंग, शशक, वृक्ष ) हम अपने अकड़ चुके अंगो को दुरुस्त करते हैं।
मन की आँखों से जब हम साँसों के उतारचढ़ाव की ओर नज़र करते हैं तो यक़ीन नहीं होता कि कैसे एक दिन हम साँसे लेना भूल जाएँगे और हमेशा के लिए कुंभक(साँसों की रुकी अवस्था) लग जाएगा।
कुल मिलाकर जीवन की इस कला को सीखते जाना। नित दिन निस्वार्थ भाव से कोई काम करने का संकल्प सामजिकता को ज़िंदा रखने के लिए कम नहीं है।
मेरे पेट की चरबी कम न हुई। मेरा वज़न सत्तर पर टिका है। पर बिना वजह मैं अपने भारतीय योग संस्थान द्वारा संचालित केंद्र जाना नहीं छोड़ती।यहाँ एक अपना परिवार बन गया है। जिनसे मिलने को जी करता है। मिलने मिलाने की इच्छा बनी रहे। बस हमारे लिए यही योग है।
आवाहन
करें योग रहें निरोग
करें योग रहें निरोग
21/06/2019
भारतीय योग संस्थान ,लखीमपुर खीरी
भारतीय योग संस्थान ,लखीमपुर खीरी
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