छोटे शहरों की बड़ी बातें


आपके शहर में साइकिल में हवा न हो तो आप क्या करते हैं?
कल से साइकिल में हवा नहीं थी। चले तो चले कैसे|कल ईद थी तो हर तरफ़ बंदी । आज सुबह सुबह आसपास घूम आए कहीं कोई नहीं दिखा।
थोड़ी देर में दिखा जाफ़र मियाँ हवा भरने का पम्प लिए चले आ रहे हैं। दरअसल उनको हमारे कालेज के एक कर्मचारी दुकान खोलने से पहले ही साथ लिवा लाए।
जाफ़र की दुकान सड़क किनारे खुले में हैं, वहीं पर बैठ कर साइकिल बनाते हैं।
उन्होंने सायकिल में हवा भरी मिठाई खायी और चल दिए अपनी दुकान खोलने। हमें आश्चर्य हुआ उन्होंने बोहनी के नाम पर भी कुछ नहीं लिया। कहा अगली दफे ले लेंगे।
हाँ हमने देखा है कुएँ को प्यासे के पास चल के आते । कुएँ की भलमनसाहत है ये।

२-
एक हैं भगत ।परमानेंट के अतिरिक्त टेम्परेरी चौकीदार हमारे कालेज में। हम लोग खाना खाने के बाद टहल आते हैं कालेज तक।और कुछ हाल चाल कर आते हैं। 
भगत रात की सभी लाइट जलाना बुझाना और घूम घाम के रखवाली करने का काम करते रहते हैं।
एक बार की बात है। कैम्पस में पहली मंज़िल पर स्थित हमारे घर में क़रीब दो-ढाई मीटर धामिन (साँपकी प्रजाति)रात के क़रीब नौ बजे घुस आयी।
सबके हाथ पाँव फूल गए। धामिन अपनी जान बचाए फ़्रीज़ के पीछे चिपक गई । हम लोग टॉर्च जलाए दूर से खड़े, अपनीजान बचायें।पूरा परिवार लगा हुआ,कि सरक के कहीं छिप न जाय।कोई कहे गोली मार दो कोई कहे भगाओ।
क्या किया जाय, इतनी रात,समझ न आए। किसी ने बताया भगत को बुलाओ । उतनी मुश्किल में भी हमें प्रेमचंद की कहानी मंत्र का पात्र भगत याद आ गया। हमने कहा वो क्या करेगा।
बहरहाल अपने भगत आ गए और डंडे से हटाते हुए बिना किसी हल्ला गुल्ला के धामिन को बाहर कर आए।यूँ लगा जैसे कोई छोटा मोटा कीड़ा मकोड़ा हो।
हम सब ने चैन की साँस ली।

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